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भारत में ज़ारदोज़ी कढ़ाई का मुख्य केंद्र

ियों का प्रयोग किया जाता था। किंतु वर्तमान में शिल्पकार सोने या चाँदी की पॉलिश किये हुए तांबे के तार एवं रेशम के धागे का उपयोग करते हैं।

भारत के अलावा ज़ारदोज़ी कढ़ाई ईरान, अज़रबैजान, इराक, कुवैत, सीरिया, तुर्की, मध्य एशिया, पाकिस्तान एवं बांग्लादेश में भी प्रसिद्ध है। 

भारत में ज़ारदोज़ी कढ़ाई का मुख्य केंद्र: 

भारत में ज़ारदोज़ी कढ़ाई का काम मुख्य रूप से लखनऊ, भोपाल, हैदराबाद, दिल्ली, आगरा, कश्मीर, मुंबई, अजमेर एवं चेन्नई में होता है।

ऐतिहासिक परिदृश्य:

‘ज़ारदोज़ी’ शब्द दो फारसी शब्दों ‘ज़ार’ जिसका अर्थ है ‘सोना’ और ‘दोज़ी’ जिसका अर्थ है ‘कढ़ाई’ से मिलकर बना है।

17वीं शताब्दी में मुगल सम्राट अकबर के संरक्षण में फारसी ज़ारदोज़ी कढ़ाई को अधिक मान्यता मिली।

औरंगजेब के शासन के तहत इसको मिलने वाला शाही संरक्षण बंद हो गया जिसके कारण इस कला का पतन हो गया।

गुणवत्तायुक्त सेवा के लिये सड़कों की रैंकिंग 

Rank Roads for Quality Service

सड़कों को बेहतरीन बनाने के अपने प्रयासों के तहत केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (Union Ministry of Road Transport and Highways) के अधीनस्‍थ भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (National Highways Authority of India- NHAI) ने देश भर में राजमार्गों की दक्षता का आकलन करने के साथ-साथ उनकी रैंकिंग करने का भी निर्णय लिया है।

उद्देश्य:

राष्ट्रीय राजमार्गों की दक्षता का आकलन एवं रैंकिंग करने का उद्देश्‍य जरूरत के अनुसार आवश्‍यक सुधार करना है ताकि सड़कों की गुणवत्ता बेहतर हो सके तथा राजमार्गों पर सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित हो सके। 

प्रमुख बिंदु:

दक्षता आकलन के मानदंड विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय तौर-तरीकों एवं अध्ययनों पर आधारित हैं जिनका मुख्य लक्ष्य भारतीय संदर्भ में राजमार्गों के दक्षता मानकों को तय करना है। 

दक्षता आकलन के लिये मापदंडों को मुख्यत: तीन भागों में वर्गीकृत किया गया है:

राजमार्ग की दक्षता (45%)

राजमार्ग पर सुरक्षा (35%) 

उपयोगकर्त्ता को मिलने वाली सेवाएँ (20%) 

इसके अलावा आकलन करते समय कई अन्य महत्त्वपूर्ण मानदंडों पर भी विचार किया जाएगा जिनमें परिचालन की गति, कई दिशाओं से वाहनों की पहुँच पर नियंत्रण, टोल प्लाजा पर लगने वाला समय, सड़क संकेतक, सड़क चिन्‍ह, दुर्घटना की दर, किसी घटना से निपटने में लगने वाला समय, क्रैश बैरियर, रोशनी, उन्नत यातायात प्रबंधन प्रणाली (Advanced Traffic Management System- ATMS) की उपलब्धता, संरचनाओं की कार्य क्षमता, श्रेणीबद्ध पृथक चौराहों की व्‍यवस्‍था, स्वच्छता, वृक्षारोपण, सड़क के किनारे मिलने वाली सुविधाएँ और ग्राहक संतुष्टि शामिल हैं।

प्रत्येक मानदंड पर प्रत्येक कॉरिडोर द्वारा हासिल किये जाने वाला स्कोर परिचालन के उच्च मानकों, बेहतर सुरक्षा एवं उपयोगकर्त्ताओं को अच्‍छे अनुभव कराने के लिये आवश्‍यक जानकारियाँ सुलभ कराएगा और इसके साथ ही उन सुधारात्मक कदमों को भी सुझाएगा जिन पर अमल करके मौजूदा राजमार्गों को बेहतर बनाना संभव हो पाएगा। 

इससे NHAI की अन्य परियोजनाओं के लिये भी डिज़ाइन, मानकों, प्रथाओं, दिशा-निर्देशों एवं अनुबंध समझौतों में कमियों को पहचानने एवं उन्‍हें दूर करने में मदद मिलेगी।

स्टेवियोसाइड

Stevioside

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के एक स्वायत्त संस्थान ‘नैनो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान’ (Institute of Nano Science & Technology) के शोधकर्त्ताओं ने हालिया अध्ययन में पाया है कि जब नैनोकणों पर स्टेवियोसाइड (Stevioside) का लेप किया जाता है तो ‘मैग्नेटिक हाइपरथर्मिया-मेडिएटेड कैंसर थेरेपी’ (Magnetic Hyperthermia-Mediated Cancer Therapy- MHCT) की दक्षता में वृद्धि हो सकती है।

प्रमुख बिंदु:

स्टेवियोसाइड, हनी यार्बा (Honey Yerba) की पत्तियों में प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला पादप आधारित ग्लाइकोसाइड है।

हनी यार्बा (Honey Yerba) का वैज्ञानिक नाम स्टेविया रेबाउदिआना बेर्टोनी (Stevia Rebaudiana Bertoni) है। 

इसे प्राकृतिक मिठास के रूप में उपयोग किया जाता है तथा इस तत्त्व में कैलोरी की मौजूदगी भी नहीं होती है।

मैग्नेटिक हाइपरथर्मिया-मेडिएटेड कैंसर थेरेपी’

(Magnetic Hyperthermia-Mediated Cancer Therapy- MHCT):

कैंसर चिकित्सा की MHCT विधि नियमित रूप से उपयोग किये जाने वाले सर्फैक्टेंट मोइटाईस (Surfactant Moieties) [ओलिक एसिड (Oleic Acid) और पॉलीसोर्बेट-80 (Polysorbate-80)] की तुलना में चुंबकीय नैनोकणों का उपयोग करके ट्यूमर के ऊतकों को गर्म करने पर आधारित है।

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