*⭕प्रेसेना ग्लेशियर*
Presena glacier
हाल ही में पर्यावरणीय संरक्षणवादियों के एक दल ने ग्लोबल वार्मिंग के कारण उत्तरी इटली में प्रेसेना ग्लेशियर (Presena Glacier) को पिघलने से रोकने के लिये इसके 100,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में जियोटेक्सटाइल तिरपाल शीट बिछाने की प्रक्रिया शुरू की।
प्रमुख बिंदु:
स्की सीज़न (Ski Season) की समाप्ति और ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत के साथ ही यह 6 सप्ताह की प्रक्रिया (ग्लेशियर संरक्षण की प्रक्रिया) प्रत्येक वर्ष दोहराई जाती है।
जबकि प्रेसेना ग्लेशियर पर से तिरपाल शीट हटाने की प्रक्रिया सितंबर महीने से शुरू होती है।
स्की सीज़न (Ski Season):
यह एक ऐसी अवधि है जब स्कीइंग (Skiing), स्नोबोर्डिंग (Snowboarding) एवं अन्य अल्पाइन स्पोर्ट्स स्की रिसॉर्ट के लिये अनुकूल होते हैं।
स्कीइंग, बर्फ पर फिसलने के लिये स्की का उपयोग करके चलने का एक साधन है।
एक स्की रिसॉर्ट स्कीइंग, स्नोबोर्डिंग एवं अन्य शीतकालीन खेलों के लिये विकसित एक रिसॉर्ट है।
गौरतलब है कि ग्लेशियर को ढकने के लिये जियोटेक्सटाइल तिरपाल (Geotextile Tarpaulins) का प्रयोग किया जा रहा है जो सूर्य की किरणों को परावर्तित करता है और भीतर के तापमान को बाहर के तापमान से कम बनाए रखता है। इसके जरिये बड़े स्तर पर बर्फ को संरक्षित करने में मदद मिलती है।
ग्लेशियर संरक्षण परियोजना पहली बार वर्ष 2008 में इटालियन फर्म कारोसेलो-टोनाले (Carosello-Tonale) द्वारा शुरू की गई थी। उस समय प्रेसेना ग्लेशियर के केवल 30,000 वर्ग मीटर क्षेत्र को कवर किया गया था।
वर्ष 1993 से प्रेसेना ग्लेशियरग्लोबल वार्मिंग के कारण अपनी मात्रा का एक तिहाई से अधिक भाग खो चुका है।
प्रेसेना ग्लेशियर (Presena Glacier):
यह उत्तरी इटली में ट्रेंटिनो (Trentino) एवं लोम्बार्डी (Lombardy) के क्षेत्रों के बीच अवस्थित है।
यह ग्लेशियर प्रेसनेल्ला माउंटेन (Presanella Mountain) समूह का हिस्सा है।
स्वाभिमान अंचल
Swabhiman Anchal
हाल ही में ओडिशा के माओवादी गढ़ के रूप में प्रसिद्ध मलकानगिरी ज़िले में कट-ऑफ क्षेत्र के रूप में पहचाने जाने वाले स्वाभिमान अंचल (Swabhiman Anchal) में सुरक्षा के बुनियादी ढाँचे को मज़बूत करके विकास सुनिश्चित करने में ओडिशा पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है।
प्रमुख बिंदु:
ओडिशा के मलकानगिरी ज़िले में कट-ऑफ क्षेत्र (Cut-off Area) के रूप में जाना जाने वाला स्वाभिमान अंचल माओवादियों का गढ़ रहा है।
यह क्षेत्र तीन तरफ से पानी से तथा दूसरी तरफ एक जटिल दुर्गम क्षेत्र से घिरा हुआ था। जिसके कारण यह लंबे समय से नक्सलियों का गढ़ रहा था।
ओडिशा, आंध्र प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के अधिकतर माओवादी स्वाभिमान अंचल में शरण लेते थे।
गौरतलब है कि इस क्षेत्र में सुरक्षा नेटवर्क मज़बूत होने से विकास से संबंधित गतिविधियाँ शुरू हुई हैं। जिनमें मुख्य रूप से सड़कों के निर्माण के कारण ऑटो-रिक्शा एवं सार्वजनिक परिवहन के माध्यम से ओडिशा का यह क्षेत्र विकास की मुख्यधारा में शामिल हो गया
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