अब आनलाइन डिग्री भी परंपरागत डिग्री के बराबर होगी : यूजीसी
यूजीसी के सचिव रजनीश जैन ने की नए नियमन की घोषणा
नई दिल्ली, पेट्र : देश में लाखों की
तादाद में आनलाइन डिग्री और डिस्टेंस लर्निंग डिग्री के लिए एडमिशन लेने वालों के इच्छुक लोगों के लिए खुशखबरी है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का कहना है कि अब मान्यता प्राप्त संस्थानों से हासिल की गई डिस्टेंस लर्निंग और आनलाइन पाठ्यक्रमों की डिग्री को भी परंपरागत डिग्रियों के समकक्ष ही माना जाएगा।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के सचिव रजनीश जैन ने शुक्रवार को बताया कि परंपरागत तरीके से विश्वविद्यालयों और
कालेजों से मिलने वाली स्नातक और परास्नातक डिग्रियों की ही तरह वर्ष 2014 में यूजीसी की अधिसूचना के तहत ओपन और डिस्टेंस लर्निंग से जुड़े विश्वविद्यालयों की स्नातक और परास्नातक डिग्रियों को भी
मान्यता मिलेगी। इसके अलावा, उच्च शिक्षण संस्थानों के आनलाइन पाठ्यक्रमों को भी उतना ही महत्व मिलेगा। उन्हें भी परंपरागत तरीके से परास्नातक डिप्लोमा कोर्सों और पत्राचार यानी करसपांडेंस कोसौं जितनी ही महत्ता मिलेगी। आनलाइन या डिस्टेंस लर्निंग कोर्सों में कुल भारतीय छात्रों के 25 प्रतिशत छात्र पंजीकृत होते हैं। इनमें से कुछ लोग ऐसे होते हैं जो नौकरी करते हुए यह पढ़ाई कर रहे होते हैं। रजनीश जैन ने बताया कि यह फैसला यूजीसी और आनलाइन कार्यक्रम के नियमन के नियम 22 के तहत लिया गया है।
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